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वाराणसी। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बुजुर्ग महिलाओं के लिए शुरू की गई लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना को वाराणसी परिक्षेत्र में उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। योजना के तहत केवल 11 दिनों में आठ रोडवेज डिपो की बसों से कुल 4500 बुजुर्ग महिलाओं ने निश्शुल्क यात्रा की। लाभार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए यह योजना महिलाओं के लिए आर्थिक राहत के साथ सम्मानजनक और सुविधाजनक आवागमन का माध्यम बनती दिखाई दे रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने बुजुर्ग महिलाओं की यात्रा संबंधी परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की है। आर्थिक रूप से कमजोर और परिवार के दूसरे सदस्यों पर निर्भर महिलाओं को यात्रा किराये से राहत मिलने की उम्मीद है। योजना के माध्यम से महिलाएं अब आवश्यक काम, उपचार, धार्मिक यात्रा और रिश्तेदारों से मिलने के लिए रोडवेज बसों का उपयोग कर सकती हैं।
परिवहन निगम के वाराणसी परिक्षेत्र में आने वाले आठ डिपो में योजना का लाभ दिया जा रहा है। क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पांडेय ने बताया कि निर्धारित अवधि में कुल 4500 बुजुर्ग महिलाओं ने निश्शुल्क यात्रा की है। इनमें सर्वाधिक संख्या जौनपुर और गाजीपुर डिपो में दर्ज की गई है।
जौनपुर डिपो से 960 महिलाओं ने किया सफर
रोडवेज की ओर से जारी डिपोवार आंकड़ों के अनुसार जौनपुर डिपो की बसों से सर्वाधिक 960 महिलाओं ने मुफ्त यात्रा का लाभ उठाया। दूसरे स्थान पर गाजीपुर डिपो रहा, जहां से 859 बुजुर्ग महिलाओं ने यात्रा की। दोनों डिपो से कुल 1819 महिलाओं ने निश्शुल्क सफर किया है।
वाराणसी ग्रामीण डिपो से 524 और काशी डिपो से 493 महिलाओं ने योजना का लाभ उठाया। कैंट डिपो की बसों में 479 महिलाओं ने सफर किया। इसी तरह चंदौली डिपो से 444, सोनभद्र डिपो से 437 और विंध्यनगर डिपो से 304 बुजुर्ग महिलाओं ने यात्रा की। सभी आठ डिपो के आंकड़ों को जोड़ने पर लाभार्थी महिलाओं की कुल संख्या 4500 होती है।
आंकड़ों से पता चलता है कि योजना का लाभ केवल शहरी क्षेत्रों की महिलाएं ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में रहने वाली महिलाएं भी उठा रही हैं। जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और सोनभद्र जैसे जिलों से बड़ी संख्या में महिलाओं का यात्रा करना योजना के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत माना जा रहा है।
आर्थिक बोझ कम करने में मिल रही मदद
बुजुर्ग महिलाओं को अक्सर इलाज, दवा, पारिवारिक कार्यक्रम, धार्मिक स्थलों के दर्शन और अन्य जरूरी कामों के लिए यात्रा करनी पड़ती है। नियमित आमदनी नहीं होने के कारण कई बार बस का किराया भी उनके लिए आर्थिक बोझ बन जाता है। ऐसी स्थिति में निश्शुल्क यात्रा की सुविधा उन्हें बड़ी राहत प्रदान कर सकती है।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए रोडवेज बसें आवागमन का प्रमुख साधन हैं। निजी वाहनों की तुलना में रोडवेज का किराया कम होता है, लेकिन लगातार यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए यह खर्च भी महत्वपूर्ण हो सकता है। योजना के लागू होने से पात्र महिलाओं को यात्रा किराया नहीं देना पड़ रहा है, जिससे उनकी छोटी लेकिन आवश्यक बचत हो रही है।
यह योजना महिलाओं के आत्मसम्मान और स्वतंत्रता से भी जुड़ी मानी जा रही है। यात्रा के लिए परिवार के किसी सदस्य से किराया मांगने की मजबूरी कम होने से वे अपने आवश्यक कार्य अधिक आसानी से कर सकती हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन से जुड़ने पर उन्हें दूरदराज के स्थानों तक पहुंचने की सुविधा भी मिल रही है।
यात्री सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी
योजना के बेहतर संचालन के लिए बस अड्डों और रोडवेज बसों में बुजुर्ग यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होगा। वृद्ध महिलाओं को बस में चढ़ने और उतरने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे में परिचालकों और अन्य कर्मचारियों का सहयोग महत्वपूर्ण है। बसों में आरक्षित सीट उपलब्ध कराने और यात्रा से संबंधित जानकारी सरल भाषा में देने से योजना अधिक प्रभावी बन सकती है।
बस अड्डों पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और पूछताछ केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं भी बुजुर्ग महिला यात्रियों के लिए जरूरी हैं। भीड़भाड़ वाले मार्गों पर अतिरिक्त बसों का संचालन और समय-सारिणी की स्पष्ट जानकारी मिलने से महिलाओं को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि पात्रता और निश्शुल्क टिकट प्राप्त करने की प्रक्रिया कितनी सरल रखी जाती है। आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने पर यात्रियों को बस अड्डे या बस के भीतर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जागरूकता बढ़ने पर बढ़ेगी लाभार्थियों की संख्या
परिवहन निगम के अधिकारियों का मानना है कि योजना की जानकारी अधिक महिलाओं तक पहुंचने के बाद लाभार्थियों की संख्या और बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय निकायों की मदद से इसका प्रचार किया जा सकता है। बस अड्डों पर सूचना बोर्ड और सहायता केंद्र भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
सिर्फ 11 दिनों में 4500 बुजुर्ग महिलाओं का निश्शुल्क सफर करना योजना के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है। अब जरूरत है कि यात्रा व्यवस्था को सुगम बनाए रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दी जाए। प्रभावी क्रियान्वयन के साथ लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना बुजुर्ग महिलाओं के लिए आर्थिक राहत, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आवागमन का मजबूत साधन बन सकती है।





